अब नमित खुशी खुशी अपने मसालों की दुनिया में रह सकता था। अब नमित खुशी खुशी अपने मसालों की दुनिया में रह सकता था।
ये सब बातें प्रतिमा दरवाजे के पीछे खड़ी सुन रही थी और मन-ही-मन मुस्कुरा रही थी! ये सब बातें प्रतिमा दरवाजे के पीछे खड़ी सुन रही थी और मन-ही-मन मुस्कुरा रही थी!
और हर परिवार को अपनी बहू, बेटी का साथ हमेशा देना चाहिए। और हर परिवार को अपनी बहू, बेटी का साथ हमेशा देना चाहिए।
संगीता अपने जले हुए हाथ और शब्दों से कभी ना भूलने वाले दर्द को मन में दबा कर फिर से रसो संगीता अपने जले हुए हाथ और शब्दों से कभी ना भूलने वाले दर्द को मन में दबा कर फिर...
मैं कुछ व्यक्तिगत कारणों से अपनी रचनाएँ Story Mirror से डिलीट करवाना चाहता हूँ। मैंने इस विषय मेल भी... मैं कुछ व्यक्तिगत कारणों से अपनी रचनाएँ Story Mirror से डिलीट करवाना चाहता हूँ। ...
एक बार फिर अष्टभुजा ने अपना रूप धारण किया एक बार फिर अष्टभुजा ने अपना रूप धारण किया